
छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प को ज्यादा बड़ा बाजार देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, इसके तहत देश के 5 एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ अपने शोरूम खोलेगा, ये बातें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हथकरघा को लेकर कार्यक्रम में कही, उन्होंने बताया कि इसके लिए उन एयरपोर्ट पर हम लोगों ने शोरूम खोलने के लिए जगह लेने का करार किया है, छत्तीसगढ़ की हस्तकला को ज्यादा जगह मिले और ज्यादा से ज्यादा इसमें रोजगार के अवसर पैदा हो इसके लिए हम लोग तेजी से कम कर रहे हैं.
हथकरघा हमारे देश की पहचान– सीएम साय

सीएम साय ने कहा की सुशासन सरकार स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और बुनकरों को नई पहचान और नए बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जांजगीर-चांपा का कोसा हो या बस्तर का सिल्क, हमारी समृद्ध विरासत आज देश-दुनिया के बाजार में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान बन रही है। हमारी सरकार बुनकरों व कारीगरों के सम्मान, आजीविका के सशक्तीकरण तथा पारंपरिक हथकरघा शिल्प को नई पहचान और नए अवसर दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकल से ग्लोबल और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

जनता से किया वादा पूरा कर रहे-सीएम साय
मुख्यमंत्री ने कहा की 2023 में हमने छत्तीसगढ़ की जनता से वादा किया था उसे हमने पूरा करने का काम किया है, मोदी की गारंटी को हर हाल में हमारी सरकार पूरा करने का काम कर रही है, हम लोगों का वादा था की मुख्यमंत्री का पहला काम पिछली सरकार में जो 18 लाख गरीब लोगों का आवास वंचित रह गया उसे स्वीकृत करना था, आज ये बताते हुए खुशी हो रही है की 18 लाख आवास की स्वीकृति हो चुकी है और रोज 1500 से 1600 प्रधानमंत्री आवास का निर्माण किया जा रहा हैl
विरासत का प्रतीक है भारत की शिल्पकला-पर्यटन मंत्री
छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं कला संस्कृति विभाग के मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा की भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और विरासत का प्रतीक है भारत की शिल्प कला और हस्तकरघा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भारत के लोगों से आह्वान करते हैं कि हमें स्थानीय उत्पादों को ही ज्यादा से ज्यादा जगह देना चाहिए. स्थानीय उत्पादन हमारी आर्थिक गतिविधि को ही नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति विरासत पारंपरिक शिल्प और उससे जुड़े लाखों परिवार के विकास का एक जन आंदोलन भी बनता है. कार्यक्रम में मंत्री राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के कुशल बुनकरों द्वारा तैयार पारंपरिक गमछा धारण कर प्रदेश की हस्तकरघा परंपरा को सम्मान दिया.















